कल आधे अधूरे नाटक (मोहन राकेश)फिर पढ़ा। सावित्री के चरित्र के ईर्द गिर्द नाटक आधारित है, सावित्री एक कामकाजी महिला है, जिसका घर उसी की कमाई से चलता है।पति की स्थिति  एक नाकामयाब व्यक्ति की है, वैवाहिक जीवन के कई सालो मे उसने पत्नि पर अत्याचार किए है, अब भी पत्नि पर ताने व कटाक्ष कसने से नही चूकता है। सावित्री अब चिङचिङी हो चुकी है। बेटी ने घर से भाग कर शादी कर ली है, बेटा भी बीच मे ही पढ़ाई छोङ चुका है। सावित्री घर की परिस्थितियाँ संभालते-संभालते अब हार चूकी है, थक चूकी है। अपनी हताशा अपने पति महेन्द्र पर निकालती है। पति के अत्याचार की पुष्टि बच्चो के संवादो से होती है। महेन्द्र के मित्र जुनेजा के संवादो व महेन्द्र के कटाक्षो से प्रतीत होता है कि सावित्री ने अपनी समस्याओ के समाधान के लिए अन्य पुरूषो का सहारा लिया है। जगन्नाथ से उसकी विशेष मित्रता है,, ऐसा दिखाया गया है। 
पर जिस तरह से जुनेजा सावित्री के चरित्र पर उंगली उठाता है या उसकी भटकन को उजागर करता है, उससे सावित्री का चरित्र कमजोर नही हो जाता है न ही उसकी दृढ़ता मे कमी आती है। वह एक मजबूत स्त्री है, उसने हर परिस्थति का, समाज का, अपने निर्बल पर अहंकारी, अत्याचारी पति का सामना दिलेरी से किया है, जब लङका भी उसे नाउम्मीद करता है, तब वह अधिक निराश होती है, ऐसा लगता है वह सब कुछ छोङना चाहती है, पर इससे ऐसा नही कि वह हार गई है।

सावित्री के चरित्र से यह इंगित होता है कि स्त्री को पुरूष की स्वामी की भूमिका स्वीकार नही है, वह पुरूष के अहंकार से टक्कर लेने को तैयार है। पुरूष तो पुरूष ही है, चाहे वह पति हो या प्रेमी अथवा मित्र, किसी भी रूप मे हो। वह अब अपना स्वतंत्र अस्तित्व चाहती है, उसके लिए वह अपनी पूर्ण ताकत के साथ जुझने को तैयार है। यह स्थिति तब भी थी, जब यह नाटक लिखा गया, उससे पहले भी थी, अब भी है। हर  युग मे, हर देश, प्रदेश मे ऐसी महिलाएँ रही है, जिन्होने अपने अधिकारो, अपनी पहचान के लिए संघर्ष किया। आज महिलाएँ शिक्षा पा रही है, नौकरी कर रही है, हर तबके, हर जिले, शहर, गाँव मे लङकियाँ जागरूक हो रही है।

परंतु पुरूषो को यह स्वीकार करने मे समय लग रहा है। पुरूष का अहंकार स्त्री के स्वतंत्र अस्तित्व को स्वीकार नही करना चाहता, इस नाटक मे भी जुनेजा के संवाद मे पुरूष की तिलमिलाहट झलकती है, उसका अहं हार रहा है, क्योकि स्त्री अब स्वतंत्र हो रही है। अंत मे महेन्द्र की वापसी घर-परिवार के महत्व को दर्शाती है।